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Hepatitis B और C: क्यों जरूरी है नियमित लिवर मॉनिटरिंग और जानें वायरल हेपेटाइटिस से बचाव के तरीके

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Hepatitis B और C को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि ये वायरस शरीर में कई सालों तक बिना कोई लक्षण दिखाए मौजूद रहते हैं और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। जब तक इनके लक्षण सामने आते हैं, तब तक बीमारी गंभीर स्थिति यानी लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर का रूप ले चुकी होती है। भारत में जागरूकता और स्क्रीनिंग की कमी के चलते यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।

Hepatitis B और C क्या हैं?

सरवोदय अस्पताल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक कुमार के अनुसार,
“Hepatitis B और C वे वायरस हैं जो लिवर को संक्रमित कर सूजन और बाद में स्थायी नुकसान का कारण बनते हैं। इनके फैलने के प्रमुख माध्यम हैं – खून से खून का संपर्क, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुइयों का उपयोग और मां से नवजात को संक्रमण।”

वे आगे बताते हैं,
“इन बीमारियों की खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। संक्रमित व्यक्ति वर्षों तक अनजाने में न सिर्फ खुद को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि दूसरों को भी संक्रमण फैला सकता है।”

Hepatitis B और C के आंकड़े क्या कहते हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार:

  • भारत में लगभग 4 करोड़ लोग Hepatitis B से संक्रमित हैं।
  • जबकि 60-120 लाख लोग Hepatitis C के साथ जी रहे हैं।
  • इनमें से अधिकतर को यह भी पता नहीं होता कि वे संक्रमित हैं।

Hepatitis से बचने के लिए लिवर की नियमित जांच क्यों जरूरी है?

संक्रमण के शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
इसके लिए जरूरी है:

  • लिवर फंक्शन टेस्ट
  • वायरल लोड की जांच
  • अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन जैसे टेस्ट

यह जांचें खासकर उन लोगों के लिए जरूरी हैं जो हाई-रिस्क कैटेगरी में आते हैं, जैसे कि:

  • हेल्थकेयर वर्कर्स
  • बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन लेने वाले
  • ड्रग्स का इंजेक्शन लेने वाले
  • संक्रमित व्यक्ति के परिवार के सदस्य
Hepatitis B And C
Hepatitis B And C

नियमित मॉनिटरिंग से डॉक्टर समय रहते एंटीवायरल दवाओं से इलाज शुरू कर सकते हैं:

  • Hepatitis C का इलाज अब 95% से ज्यादा मामलों में सिर्फ 12 हफ्तों में संभव है।
  • Hepatitis B के लिए इलाज उपलब्ध है जो वायरस को दबाकर लिवर को फेल होने और कैंसर से बचाता है।

Hepatitis को जड़ से खत्म करने के लिए क्या करें?

भारत ने WHO के लक्ष्य के अनुसार 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करने का संकल्प लिया है। इसके लिए जरूरी कदम:

यूनिवर्सल स्क्रीनिंग

  • गर्भवती महिलाओं, डायलिसिस मरीजों, हेल्थकेयर वर्कर्स की नियमित जांच।

टीकाकरण

  • Hepatitis B वैक्सीन बेहद असरदार है और भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा है।

सुरक्षित मेडिकल प्रैक्टिस

  • सुइयों का सुरक्षित उपयोग, सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, अस्पतालों में संक्रमण की रोकथाम।

जन-जागरूकता अभियान

  • लोगों को टेस्टिंग, बीमारी से जुड़े मिथकों और सही व्यवहार की जानकारी देना।

मुफ्त जांच और इलाज

  • भारत सरकार की राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण योजना (NVHCP) के तहत मुफ्त इलाज और टेस्टिंग उपलब्ध कराई जा रही है।

Hepatitis से जुड़ी अहम बातें

Hepatitis B और C जैसी बीमारियों से बचाव, इलाज और कुछ मामलों में इलाज संभव है। परंतु जागरूकता की कमी के चलते लाखों लोग बिना इलाज के जी रहे हैं। यदि समय रहते लिवर की नियमित जांच और उचित इलाज किया जाए तो इस “साइलेंट किलर” को हराया जा सकता है।

अब समय है जागरूक होने का – लिवर की सेहत से कोई समझौता न करें।

FAQs

❓ Hepatitis B और C मरीजों को कौन-कौन से लाइफस्टाइल बदलाव अपनाने चाहिए?

स्वस्थ खानपान, शराब से दूरी, नियमित एक्सरसाइज और दवा का पालन जरूरी है।

❓ नियमित लिवर मॉनिटरिंग क्यों जरूरी है?

क्योंकि इससे बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर इलाज संभव हो पाता है।

❓ लिवर डैमेज की जांच कितनी बार करानी चाहिए?

जोखिम वाले लोगों को हर 6 से 12 महीने में लिवर फंक्शन टेस्ट कराना चाहिए।

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I am a dedicated health and fitness writer with two years of experience covering a wide range of health issues. My unique perspective allows me to deliver insightful and impactful content in the health world.

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